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सातवें वेतन आयोग की सिफारिश में कर्मचारियों के हाथ 'लड्डू'

विवेकानंद सिंह
सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भले ही वेतन और भत्ता समेत 23.55 फीसदी की बढ़ोत्तरी होती दिख रही है, लेकिन 10 वर्षों में होनेवाली इस बढ़ोत्तरी को मंहगाई के अनुपात में काफी कम कहा जा सकता है। दरअसल, सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौंप दी गई. यह रिपोर्ट जस्टिस एके माथुर की अध्यक्षता में तैयार की गई है. इस वेतन आयोग का गठन तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के समय फरवरी, 2014 में किया गया था. इस वृद्धि को लेकर कर्मचारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया है। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की तुलना में भी यह कम है, तब वेतन और भत्ता समेत लगभग 40 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई थी। हालांकि सातवें वेतन आयोग में की गई कई सिफारिश कर्मचारियों को परेशानियों से निजात दिलायेगा। लेकिन आइये देखते हैं कि कैसे इस सिफारिश से केंद्रीय कर्मचारियों को निराशा हुई है।

  • सातवें वेतन आयोग की इस सिफारिश में कंपोजिट(बेसिक और डीए) सैलरी में मात्र 14.2 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है।
  • ट्रांसपोर्टेशन अलाउंस में किसी प्रकार के वृद्धि की सिफारिश नहीं की गई है, यह पूर्ववत बना रहेगा.
  • एचआरए में 63 प्रतिशत वृद्धि की सिफारिश तो की गई है, लेकिन ओवरऑल देखा जाये तो शहरों की ग्रेडिंग के मुताबिक यह बेसिक का 8, 16 और 24 प्रतिशत हो जायेगा. जबकि अब तक यह क्रमशः 10, 20 और 30 प्रतिशत था।
  • इस सिफारिश में फैमिली इंडेक्स को तीन (3) रखा गया है, जिसमें 1 नौकरीपेशा व्यक्ति, (.80) उनकी पत्नी और .6-.6 (1.2) उनके बच्चे को शामिल किया गया है। इसमें समस्या है, जैसे अगर किसी के माता-पिता बेटे पर आश्रित हैं तो उनके लिए क्या? फैमिली इंडेक्स को पांच रखने की मांग की गई थी।
  • अभी अगर किसी को 18,500 सैलरी मिल रही है तो इस सिफारिश के लागू हो जाने के बाद 1 जनवरी, 2016 से उनको 22,250 रुपये ग्रॉस वेतन मिलेंगे। यानी सबसे नीचले लेवल की सैलरी में कुल 3,750 रुपये की वृद्धि होगी। यहां गौर करना आवश्यक है कि यह वृद्धि 10 साल में एकबार होती है।
  • इसमें कुछ अच्छी सिफारिशें भी हैं जैसे, इसमें 52 तरह के भत्तों को खत्म करने व अन्य 36 को मौजूदा भत्तों में समाहित करने की सिफारिश की गई है।
  • कहीं टूर पर जानेवाले नौकरीपेशा व्यक्ति को इस सिफारिश के लागू हो जाने के बाद कई मौकों पर बिल दिखाने की आवश्यकता नहीं  होगी।
  • इसमें ग्रुप इंश्योरेंस से संबंधित एक सिफारिश काफी अजीब है। अब तक इसके लिए एक इंप्लाई का सैलरी से 60 रुपया कटता था लेकिन अब इसके लिए 18,000 की सैलरी पानेवाले के 1500 रुपये कटेंगे। इसका लाभ नौकरी में रहते हुए किसी प्रकार की दुर्घटना होने की स्थिति में परिवारवालों को होगा, अगर ऐसा नहीं होता है तो रिटायरमेंट के बाद उनको 70 प्रतिशत राशि वापस मिलेगी।
  • कुल मिलाकर देखें तो जहां पेंशन कर्मियों को इस सिफारिश से ठीकठाक लाभ होता दिख रहा है वहीं कर्मचारियों के हाथ में कुछ खास नहीं आ रहा है। उन्हें जहां एक हाथ से दिया जा रहा है, वहीं पीछे से निकाल भी लिया जा रहा है।

(लेखक युवा पत्रकार हैं)

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