विवेकानंद सिंह देश में आपातकाल लगने के 40 साल पूरे होने जा रहे हैं। अगर मैं बात अपने पीढ़ी की करूँ तो हमने आपातकाल को देखा नहीं है। लेकिन अपने बड़े-बूढ़ों में से जिसने भी उस दौर की बातें बताई वह एक भयावह दास्तां थी। कल ही गुड़गांव में रायबरेली के रहने वाले एक वृद्ध मिले। कांग्रेस के प्रति अपार श्रद्धा रखने के बावजूद इमरजेंसी का जिक्र आते ही वह बोले, “उ जो इ लोग नसबंदी कराये लगन था, बड़ा गलत कीन था”। हर आम-खास जिसने इमरजेंसी को देखा और जिया था, वह आपातकाल को गुलामी से भी बदतर ठहराने को तैयार हुआ। पिछले दिनों जब भाजपा के मार्गदर्शक और वरिष्ठतम नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस को दिये अपने साक्षात्कार में कहा कि वो आज भी ये यकीन से नहीं कह सकते कि अब देश में इंमरजेंसी नहीं लग सकता है।यानी कि देश इमरजेंसी काल से 40 साल आगे बढ़ चुका है लेकिन देश के हालात आज भी कुछ ऐसे हैं जिससे हमारे बुजुर्गों को इमरजेंसी का खतरा नजर आता है। आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के काले अध्याय के रूप में हमेशा याद किया जाता रहा है और आगे भी किया जाता रहेगा। क्यों लगा था आपातकाल...
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