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मेरा मन



मन लौट दीवाना चुपके से
कुछ याद दिलाता जाता है
तोड़ो बंधन मुक्त करो
बार-बार कह जाता है
सपने कुछ ढह जाते है
कुछ मिट्टी में मिल जाता है
कुछ ऐसी बातें आती हैं
मन चुपके से सह जाता है
ये प्रखर ध्वनि जीवन का
कुछ मुझसे नित कह जाता है
मन लौट दीवाना चुपके से
कुछ याद दिलाता जाता है

विवेकानंद
आई आई एम सी

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