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देश की आधी आबादी में महिला वैज्ञानिक और उनका संघर्ष

तेरे माथे पे ये आँचल, बहुत ही खूब है लेकिन,
तू इस आँचल से एक परचम बना लेती तो अच्छा था।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अवसर पर मजाज़ का ये शेर, सीएसआईआर के जाने-माने वैज्ञानिक और कवि गौहर रज़ा ने विज्ञान प्रसार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कही।
CSIR SCIENTIST, GAUHAR RAZA
विज्ञान प्रसार और निस्केयर के संयुक्त प्रयास से उन भारतीय महिला वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया जिन्होंने भारत के विज्ञान को नई दिशा और नया स्वरूप दिया है। उन महिला वैज्ञानिकों से आने वाली पीढ़ी प्रेरणा ले सकें इसके लिए प्रो. गौहर रज़ा के निर्देशन में 13 एपिसोड की फिल्म बनाई गई है जिसमें प्रत्येक की समयसीमा 26 मिनट है, जो उन वैज्ञानिकों के जीवन को बताती है। फिल्म का नाम "Scientifically Yours" है। इसके बेहतर प्रसार के लिए फिल्म को भिन्न-भिन्न जगहों पर दिखाने के अलावे इसे यू ट्यूब पर भी डाल दिया जाएगा।

"अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस" के उपलक्ष्य में इन फिल्मों के सम्पादित अंश (Curtain Raiser on "Scientifically Yours" A film on Indian Women Scientists) को विज्ञान प्रसार के सभागार में लांच किया गया।  

फिल्म से पूर्व एक चर्चा का आयोजन किया गया था, जिसमें उन वैज्ञानिकों ने अपने विचार श्रोताओं और मीडिया के समक्ष रखे, सम्मानित महिला वैज्ञानिकों के विचार मैं क्रमशः आपलोगों के समक्ष रखता हूँ।

  1. डॉ मंजू शर्मा( Ex. Secretory DBT) - 
    Dr. MANJU SHARMA
बॉयोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काफी जानी-मानी वैज्ञानिक हैं। इन्होंने कहा कि कल के मुकाबले आज कई सारे आकर्षक सुविधायें लड़कियों के लिए मौजूद हैं। आज लड़कियाँ विज्ञान में अपना भविष्य बना सकती हैं। उन्होंने अपनी सलाह में कहा कि.. Dream Makes Every Thing Easy(स्वप्न सबकुछ आसान बना देती है).  

2. डॉ इन्दिरा नाथ(AIIMS)  
Dr. INDIRA NATH
चिकित्सा जगत के एक स्तम्भ के रूप में विख्यात तथा कुष्ठ रोग के क्षेत्र में अपने अतुलनीय काम के लिए मशहूर डॉ नाथ ने कहा कि हमें विज्ञान संचार को बेहतर और विश्वसनिय बनाने की आवश्यक्ता है। उन्होंने ब्रेकिंग न्यूज की बात करते हुए कहा कि विज्ञान की खोज़ ब्रेकिंग न्यूज नहीं बन पाती हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान ही हमारे देश में आर्थिक "समृद्धि" ला सकती है, विज्ञान को लेकर मीडिया के मौजूदा भूमिका पर उन्होंने प्रश्न उठाये।

 3. डॉ कस्तूरी दत्ता(Professor of Cellular & Molecular Biology, JNU) 
Dr. KASTURI DATTA
जेएनयू में कोशिका विज्ञान की अध्यापिका अपने क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि कल भी विज्ञान के क्षेत्र में महिला उपेक्षा की शिकार थी और आज भी है। भारतीय विज्ञान काँग्रेस में आज भी 3से 4  महिला वैज्ञानिक थे। उन्होंने स्कोप ऑफ साइंस कम्युनिकेशन की बात करते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में भी टेलीविजन की पहुँच है, इसके माध्यम से विज्ञान का प्रसार किया जा सकता है।

 4. डॉ बिमला बुटी(Field of plasma Physics, INSA)
Dr. BIMLA BUTTI

भौतिकी के क्षेत्र में अपने कार्यों के लिए विख्यात डॉ बुटी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से सिर्फ महिला ही नहीं हमारे देश का युवा वर्ग भी बेसिक विज्ञान से दूर भाग रहा है, चाहे पैसे की वज़ह से अथवा उन्हें लगता है कि इतने दिनों कि पढ़ाई में उन्होंने क्या पाया? उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सिर्फ पैसे की तरफ ना जायें। उन्होंने कहा कि आप मेहनत करके पेपर तैयार करते हैं और जब वो पेपर प्रकाशित होता है तो उस समय जो संतुष्टी का भाव आता है वह बैंक में बैठ कर पैसे गिनते वक्त तो कतई नहीं आ सकता है। उन्होंने अंत में कहा कि..(Problem is every where but Your Passion makes Way) समस्या सभी जगह है लेकिन आप की इच्छाशक्ति ही राह तैयार करती है।

  5. डॉ चन्द्रिमा साहा(Director NII) 
Dr. CHANDRIMA SAHA
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी की वर्तमान निदेशक डॉ चन्द्रिमा साहा Endocrinology के क्षेत्र में अपने काम के लिए प्रख्यात हैं। उन्होंने कहा कि देश की आधी आवादी को साथ लिए बिना तरक्की की परिकल्पना संभव नहीं है।

  6. डॉ सुनिता सक्सेना(Scientist from ICMR) 

Dr. SUNITA SAXENA
पैथोलॉजी के क्षेत्र में अपने कार्य के लिए मशहूर डॉ सक्सेना ने कहा कि विज्ञान की राह लम्बी है, धैर्य ही विजेता बना सकता है। उन्होंने महिला के संबंध में कहा कि हम अपनी क्षमता से कम आंके जाते हैं, और कई बार हमें अपने-आप को प्रमाणित करना पड़ता है। 

 7. डॉ चित्रा सरकार(Neuropathologist, AIIMS) 
Dr. CHITRA SARKAR
एम्स की डॉ सरकार ने कहा कि जब हम बेटी होते हैं तो उतनी समस्याएँ नहीं होती हैं, लेकिन एक औरत के जीवन में शादी के बाद कैरियर ब्रेक लगता है। उन्होंने कहा कि पुरूषों की तुलना महिला ज्यादा मल्टी टास्कर होती हैं, साइंस नेटवर्किंग का विषय है। उन्होंने कहा कि मैं बंगाल से हूँ हम मानते हैं कि हम दुर्गा हैं। 

 8. डॉ विभा टंडन(Woking in field of Medicinal Chemistry,JNU) 
Dr. VIBHA TANDON
डॉ विभा टंडन ने कहा कि अंतर हमारे सोच में हैं, उसमें बदलाव की आवश्यक्ता है। हमें इस तरह के प्रोग्राम को छोटे शहरों में करने की आवश्यक्ता है। उन्होंने कहा कि आप अपने आप से प्रतिस्पर्धा करें आप अवश्य विजयी होंगे। 

  9. डॉ रूपमंजरी घोष(Quantum physicst, JNU)
Dr. RUPAMANJARI GHOSH
डॉ घोष ने अपने पहले उदघोष में कहा कि मुझे भारतीय होने पर गर्व है। हमारे यहाँ पुरूष और महिलाओं के लिए नीति में कोई अंतर नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि आपका महिला होना ही कभी-कभी नोटिस किये जाने की वजह होती है। उन्होंने आशा जताई कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब महिला को स्पेशल स्टेटस देने की बात नहीं की जाएगी।

इस कार्यक्रम में सीएसआईआर के कई वैज्ञानिक, विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले पत्रकार मौजूद थे। सम्मान हेतु महिला वैज्ञानिकों का चयन उनके भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, इम्यूनोलॉजी, कृषि आदि क्षेत्रों में किये गये विशिष्ट कार्य के आधार पर किया गया। CSIR-NISCAIR के द्वारा बनाई गई इस फिल्म को देश के स्कूल, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय के विभागों में दिखाया जायेगा, ताकि ना सिर्फ लड़कियों में विज्ञान के प्रति रूची का विकास हो वरण लड़कों में भी विज्ञान के लिए दिलचस्पी बढ़े।

विवेकानंद सिंह(आईआईएमसी, हिन्दी पत्रकारिता)

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