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व्हिसलब्लोअर संरक्षण संशोधन विधेयक और सरकार की मंशा

विवेकानंद सिंह
लोकसभा में 13 मई बुधवार को मोदी सरकारद्वारा व्हिसलब्लोअर संरक्षण (संशोधन) विधेयक लाया गया, जो कि सदन में पारित भी हो गया। इसमें सरकार ने व्हिसलब्लोअर संरक्षण कानून, 2011 के तहत दी जाने वाली सूचनाओं के दायरे को कम करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के मुताबिक अब इस कानून के तहत भ्रष्टाचार उजागर करने वाले लोग कम ही तरह की सूचनाओं को डिसक्लोज कर पाएंगे। सरकार ने इस संशोधन विधेयक को पारित करा कर मूलतः व्हिसलब्लोअर संरक्षण कानून की ताकत को कम करने का काम किया है। यह संशोधन विधेयक सरकार की भ्रष्टाचार को लेकर संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है।

वहीं सरकार का मानना है कि इस संशोधन विधेयक को लाने के पीछे उनका मकसद उन खुलासों के प्रति सुरक्षा के लिहाज से लाया गया, जिनसे देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरा हो सकता है। लेकिन प्रश्न यहाँ आकर अटकता है कि इस देश में आखिर वो ऐसा कौन सा भ्रष्टाचार है जिसके उजागर होने से देश की संप्रभुता और अखंडता पर खतरा मंडराने लगेगा? हालांकि इस पर कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले लोगों की पर्याप्त सुरक्षा ध्यान में रखते हुए यह संशोधन लाया गया है। संशोधन विधेयक के जरिए व्सिलब्लोअर संरक्षण अधिनियम-2011 की धारा चार और आठ में संशोधन किया गया है। लेकिन अब इस संशोधन के बाद व्हिसलब्लोअर उन कागजातों और सूचनाओं को मुहैया कराने में सक्षम नहीं होंगे जिन्हें सरकारी गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत संरक्षित किया गया है।

इस तरह से सरकार के सभी वर्गीकृत और गोपनीय दस्तावेज व्हिसलब्लोअर की पहुंच से बाहर हो जाएंगे। साथ ही व्हिसलब्लोअर को सरकार और इसके एजेंसियों से जुड़ी ऐसी किसी भी सूचनाओं का खुलासा करने की इजाजत नहीं होगी जिन्हें सूचना के अधिकार कानून, 2005 से छूट दी गई है। अब इस संशोधन के बाद पूंजीपति और कॉरपोरेट जगत की गलतियों को भी उजागर करने की गुंजाइश कम ही होगी। यदि कोई वकील या एजेंट किसी सूचना को लीक करता है तो उसे भी कानून द्वारा संरक्षित तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि वो सूचनाएं आरटीआई के जरिये न हासिल की गई हों।

एक तो यह कानून पहले से व्हिसलब्लोअर को सुरक्षा देने में नाकाफी साबित हो रहा था, उपर से मोदी सरकार द्वारा यह संशोधन पारित कराकर सीधे-सीधे भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मसलों पर आवाज उठाने वाले लोगों का मुंह बंद करने की कोशिश हुई है। पिछली रात को ही मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाला मामले में व्हिसलब्लोअर प्रशांत पांडे की कार को ट्रक ने टक्कर मारी। प्रशांत के मुताबिक टक्कर जानबुझ कर मारी गई थी। भोपाल के बायपास पर हुए इस हादसे में प्रशांत पांडे की पत्नी और और परिजनों को चोट आई है। व्यापमं मामले में अबतक 7 लोग मारे जा चुके हैं। वहीं व्यवस्था के फेल्योर को देखें तो आसाराम और उसके बेटे नारायण सांई के मामले में अबतक गवाहों पर कई बार जानलेवा हमले हो चुके हैं और इस दौरान कई मौतें भी हो चुकी हैं बाकी के गवाह भी इस बात से खौफ में हैं। ऐसे में व्हिसलब्लोअर संरक्षण कानून-2011 को राष्ट्रसुरक्षा का हवाला देते हुए कमजोर किया जाना कितना सहीं है यह तो समय ही तय करेगा?

देश के आमलोगों के लिए यह समझना काफी जरूरी है कि व्हिसलब्लोअर संरक्षण कानून असल में है क्या? अगर इसके नाम को हिन्दी में अनुदित करें तो इसका मतलब है ‘भ्रष्टाचार सूचना-प्रदाता संरक्षण कानून’। इस कानून को 2011 में संसद से पास कराया गया था। इस कानून का मुख्य उद्देश्य रहा है नौकरशाही के भ्रष्टाचार या, गलत कार्यों का खुलासा करने वालों की हिफाज़त करना। नौकरशाही परोक्ष रूप से सही लेकिन सीधे सत्ता से जुड़ी होती है ऐसे में इसका व्यापक ध्येय भ्रष्टाचार पर नकेल कसने हेतु सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देना रहा है। यह देश का अपने आप में ऐसा पहला कानून रहा है जिसके जरिए किसी मामले को उजागर करने वालों के हिफाज़त करने का प्रावधान है। इस कानून के बने होने के बावजूद हाल के महीनों में, देशभर में गलत कार्यों का उजागर करने वालों पर जानलेवा हमले हुए हैं। व्यापमं घोटाला मामले में ही व्हिसलब्लोअर प्रशांत पांडे के मुताबिक उनकी सुरक्षा में दिए गए पुलिस कई दिनों से आए ही नहीं है।

इस संशोधन के बाद कहा जा सकता है कि भ्रष्टाचार पर लगाम कसने हेतु बनी स्वतंत्र इकाई केन्द्रीय सतर्कता कमीशन (सीवीसी) के उपर और दबाव बढ़ेगा। हालांकि पिछले कानून में भी काफी कमियाँ थी लेकिन इस सरकार ने संशोधन के जरिए उन खामियों को दूर करने के वजाय इस कानून में और खामियाँ बढ़ा दी है। मुझे नहीं लगता कानूनों में ऐसे संशोधन के जरिए भ्रष्टाचार खिलाफ उठते आवाज को मजबूत किया जा सकता है, देखा जाए तो सरकार ऐसे लोगों (व्हिसलब्लोअर) से डर रही है और आमलोगों का स्नेह बनाए रखने के लिए राष्ट्रसुरक्षा का हवाला दे रही है। राष्ट्रसुरक्षा अपने आप में अहम मुद्दा अवश्य है लेकिन उसके लिए ये संशोधन कुछ हजम नहीं हो रहा और सरकार की मंशा पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है।

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