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सुनिये आपका दोस्त कुछ सुना रहा है(एड्स जागरूकता)



एड्स एक लाइलाज बीमारी है। युवा वर्ग इस आधुनिक युग में मदहोशी का आंचल लिए इस बीमारी का आलिंगन ना कर लें यह डर सभी को रहता है। बस सजग रहा जाये तो इस भयावह बीमारी से बचा जा सकता है। प्रत्येक वर्ष 01 दिसंम्बर को हम विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाते हैं। अपनी सजगता व्यक्त करने एक छोटी सी कोशिश.....


एड्स पर आज की चर्चा है हमारी,
ये कोई बीमारी नहीं, है एक महामारी।

1981 ई. में धरा पर इसको पहली बार पाया,
आज तो यह पूरे विश्व का कोढ़ बनकर छाया।

एड्स होता है रिट्रो वायरस के संक्रमण से,
जिसे जाना जाता है ह्यूमन इम्यूनोडिफिसीएन्सी वायरस नाम से,
इसे फैलने से रोका जा सकता है निम्नलिखित काम से,

असुरक्षित यौन सम्बन्ध कभी ना बनाओ,
पति-पत्नी एक दूसरे के प्रति वफादारी निभाओ,
अन्यत्र सम्बंध समय कंडोम लगाओ,
संक्रमित खून से अपने को बचाओ,
बिना जाँच खून ना चढ़वाओ,
प्रयोग हुई सुई, अस्तुरे का ब्लेड इस्तेमाल में ना लाओ।
गर्भावस्था में एचआईवी टेस्ट करवाओ,
होने वाले बच्चे को संक्रमण से बचाओ,
इस तरह एड्स रूपी महामारी से अपने को दूर पाओ,

एड्स कोई बीमारी नहीं, एड्स से कोई मरता नहीं,

इससे शरीर के प्रतिरोधी क्षमता का होता नाश,
टी लिम्फोसाइट सेल का होता लॉस

इस तरह बुखार खांसी इत्यादि होती
शरीर अपना आस्तित्व है खोती

इस भ्रांति को मन में कभी ना पाले,
कि एड्स हो जाए अगर मच्छर काट डाले,

चाहे संक्रमित व्यक्ति के साथ खाना खाले,
अत: यह दुर्भावना कभी ना पालें,
संक्रमित व्यक्ति को समाज से ना निकालें,

यह बीमारी है लाइलाज,
पर जीना इसके साथ संभव है आज,

एआरटी अपनाये संक्रमित व्यक्ति,
एचआईवी के साथ बढ़ाये जीवन शक्ति।

संक्रमित जीवन अपनाना जानें,
एड्स ग्रसित से कभी छुआछुत ना माने,

शायद आपका स्नेह और प्यार,
दे एड्स ग्रसित की जिन्दगी संवार,

एक दिस. को मनाते हैं विश्व एड्स दिवस के रूप में सभी
ताकि इसके जागरूकता में ना रहे कोई कमी,

युवाओं में जरूरत है जागरूक होने की,
ताकि कभी जरूरत ना पड़े इसके खातिर रोने की,

अत: जागरूकता की खातिर कविता रूपी अभियान चलाया,
और अपने दोस्तों का पूरा सहयोग पाया।

विवेकानंद 

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