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जीत की स्याही....

देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और कला-संस्कृति सभी में बदलाव की वयार सी चल पड़ी है। मुझे बर्फ का गोला याद आ रहा है, कैसे वह पल में अपनी शक्ल खोता है और ठोस से द्रव बन जाता है। चुनाव के करीब आते ही राजनीतिक पार्टीयाँ भी ऐसे ही अपना रूप बदलना शुरू कर देती है, यहाँ जनता के लिए दुविधा की स्थिति आ जाती है। कल देश ने जो भ्रष्ट्राचार सहा वो उसके आधार पर वोट करें या फिर खाद्य सुरक्षा, लोकपाल जैसे जनपक्षी बिल को देखते हुए वोट करें।


दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव ने देश के सामने एक विकल्प दिया है जो भ्रष्ट्राचार मुक्त भारत की बात करता है, लेकिन उसके पास अच्छी राजनीति के लिए अच्छे लोगों का आभाव नज़र आता है। कोई नस्लवादी टिप्पणी करता है तो कोई अपने आप के उच्चकुलिन होने का दंभ भरता है। लेकिन गाँधी जी के स्वराज़ की परिकल्पना को हक़ीक़त में बदलने का सपना संजोये आम आदमी पार्टीने राजनीति समर में जन्म लिया और दिल्ली के लोगों का भरपूर स्नेह भी पाया।


पुरानी सारी पार्टीयाँ ये खतरा महसूस कर रही है कि उसकी ज़मीन कहीं आम-आदमी पार्टी ना हथिया ले। कांग्रेस सरकार के दस वर्ष के शासन काल में जनता के सामने मंहगाई एक यक्ष प्रश्न बनकर सामने आया है, इस प्रश्न का उत्तर देने में बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी हाथ खड़े कर रहे हैं। ये कांग्रेस के गले की फांस बन चुका है।


ठीक ऐसे वक्त में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी का आरक्षण के मापदंड में बदलाव करने वाला वयान, राजनीत में एक नया मोड़ देकर जनता में भ्रम की स्थिति पैदा करने की तरफ ईशारा करता है। कांग्रेस उनके वयान को खारिज़ कर रही है।


उधर नरेन्द्र मोदी अपने गलत तथ्यों वाले वयानों से सुर्खीयों में बने रहते हैं। भाजपा की जिन पाँच राज्यों में सरकार है उनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़ और गोवा राज्य है जहाँ से 543 में से मात्र 96 सांसद चुनकर आते हैं। तो ऐसे में मोदी और राजनीति में दांव लगाने के लिए हर एक मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन एक बात तय मानी जा रही है कि बिना गठबंधन के केन्द्र की सत्ता का स्वप्न साकार नहीं होने वाला है।


लोकतंत्र के चौथे खंबे का लिहाफ ओढ़े पत्रकारिता में भी बदलाव का दौर जारी है। दोष किसका सोच का या समाज का, यह द्वन्द सभी के अंदर उछल-उछल कर शोर मचा रहा है। सच मानिए तो हमारा लोकतंत्र अपने अंदर छन्नापत्र लगाए हुए है जो भारतीय लोकतंत्र की शुचिता को बनाए रखेगा।


विज्ञान में नित नये किर्तिमान स्थापित हो रहे हैं, चार हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने वाली अग्नि-4 अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाईल अब भारत के पास है। मंगलयान के बाद अब सूरज पर इसरो की नज़र है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गये हैं।


सबसे बड़ा खतरा है अमीर-गरीब के बीच की बढ़ती खाई, एक ओर तो कमाने की आज़ादी अच्छी लगती है तो दूसरी तरफ बड़ी-बड़ी इमारतों के बीच नंगे वदन वाला गरीब खुद को और छोटा महसूस करता है।

लेकिन इन प्रश्नों का उत्तर जिस स्याही से लिखी जाएगी वही विजेता बनेगा। अच्छे के लिए इंतजार करना धैर्यवान की शक्ति है।

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