सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

खेल-खेल में टेक्नो फ्रेंडली बनाते खिलौने

खिलौने सिर्फ खेल या मनोरंजन के लिए नहीं होते. खिलौने तुम्हें बहुत कुछ सिखाते भी हैं. पिछले कुछ वर्षों में खिलौने के स्वरूप में काफी परिवर्तन आया है. आज तरह-तरह के हाइटेक खिलौनों की मदद से बच्चे टेक्नो फ्रेंडली भी बन रहे हैं. खिलौने बच्चों के अंदर प्रोग्रामिंग, डिजाइनिंग, म्यूजिक, इंजीनियरिंग जैसी प्रतिभाओ को उभारने का भी काम कर रही हैं. खास बात यह है कि आज के दौर में वैज्ञानिक और इंजीनियर्स भी किसी प्रोडक्ट को साकार रूप देने से पहले खिलौने के जरिये ही अपना परीक्षण पूरा करते हैं. इनके बारे में तुम्हें भी जानना चाहिए. विवेकानंद सिंह की प्रस्तुति.


आज के दौर में टॉय इंडस्ट्री एक बड़ा बाजार बन कर उभरी है. किसी मॉल में जाओ या दुकान में वहां तुम्हें तरह-तरह के खिलौने मिलेंगे. आजकल परंपरागत खिलौनों के साथ तकनीक को जोड़ने का नया रुझान देखने को मिल रहा है. इसकी वजह से खिलौने भी काफी हाइटेक रूप में हमारे सामने आ रहे हैं. इन्हें तुम्हारी कल्पनाओं को सच करने के लिए मॉडल के रूप में भी प्रयोग किया जा रहा है. तुम्हें जान कर आश्चर्य होगा कि इन छोटे-छोटे खिलौनो को बनानेवालों में बड़े-बड़े इंजीनियर, डिजाइनर, साइंटिस्ट, प्रोग्रामर और टेक गुरु आदि शामिल हैं. आज दुनिया की कई बड़ी-बड़ी कंपनियां भी खिलौने का निर्माण कर रही हैं.

रोबोटिक्स से जुड़े खिलौने

रोबोटिक्स के मेल से तैयार खिलौने तुम्हें रोबोटिक और मेकेनिकल इंजीनियरिंग को समझने में काफी मददगार साबित होते हैं. आजकल स्मार्टफोन एप की मदद से इन्हें जोड़ दिये जाने कि वजह से यह और हाइटेक हुआ है. इसकी मदद से तुम्हें इस बात का भी पता चल पाता है कि रोबोट किस तरह काम करता है. ऐसे तकनीकवाले खिलौने रोबोट से जुड़े व्यावहारिक पहलू को समझने में भी तुम्हारी मददगार साबित होते हैं. इस श्रेणी में कई तरह के प्रोग्रामेबल रोबोटिक खिलौने आते हैं. उनमें बो एंड याना, रोबोटिक रोवर हेल्पर आदि प्रमुख हैं.

1. रोविंग रोबोट हेल्पर
यह रोबोटिक हेल्पर तुम्हारे एसिस्टेंट की तरह काम करता है. इसे चलाने के लिए न, तो किसी कंप्यूटर की जरूरत है और न ही किसी रिमोट की, इसे तुम्हें बस कुछ इंस्ट्रक्शन देने होते हैं. जैसे अगर तुम्हें प्यास लगी हो या बेडरूम की रखवाली करनी हो, यह इन कामों को पूरा करने में माहिर है. हालांकि यह रोवर छह साल की उम्र से बड़े बच्चों का ही अच्छा दोस्त साबित हो सकता है. यह रोवर बैटरी से चलता है. यह चार्जेबल है. इस रोविंग रोबोट हेल्पर को नेशनल ज्योग्राफी और स्टेम कंपनी ने मिल कर तैयार किया है. स्टेम को एस- साइंस, टी- टेक्नोलॉजी, इ- इंजीनियरिंग, एम- मैथेमेटिक्स के कॉन्सेप्ट पर शुरू किया गया था. इन विषयों को ध्यान में रख कर ही यह कंपनी खिलौने तैयार करती है. हालांकि तुम्हें रोविंग रोबोट हेल्पर जैसे प्रोडक्ट अब कई अलग-अलग कंपनियों के भी मिल जायेंगे.   

2. पिक-अ-बो रोबोट
पिक-अ-बो रोबोट में बो एंड याना दो अलग-अलग रोबोट्स हैं, जो तुमसे बात कर सकते हैं. ये कुछ छोटे-मोटे काम भी कर सकते हैं. ये पूरी तरह प्रोग्रामेबल हैं. इसकी मदद से तुम खेल-खेल में ही प्रोग्रामिंग करना सीख सकते हो. ये रोबोट नाच सकते हैं, गा सकते हैं और फर्श पर पड़े सामानों को भी इकठ्ठा कर सकते हैं. इसकी प्रोग्रामिंग बिलकुल आसान है. बस तुम्हें कुछ कमांड देने होते हैं. इसमें टच स्क्रीन सेंसर भी लगे हुए हैं.

3. बिल्डिंग ब्लॉक टॉय रोबोट
तुम सबने ब्लाक जोड़-जोड़ के खूब खिलौने बनाये होंगे. यह भी कुछ ऐसा ही है. यह एक फोर-इन-वन प्रोडक्ट है, जो हर उम्र वर्ग के बच्चे इस्तेमाल कर सकते हैं. इस किट का इस्तेमाल करके तुम खुद अपना गेम बना सकते हो, कोड सीख सकते हो. इसे एजुकेशनल वे में फन के लिए तैयार किया गया है. यह काफी हद तक उन खिलौनों के जैसा है, जो बढ़ते हुए बच्चों के लिए बनाया जाता है. इसे तुम आसानी से पैक करके कही भी ले जा सकते हो. इसकी खासियत है कि तुम इसके चार हिस्सों से चार डिफरेंट एनिमल जैसे- डॉग, रैबिट, क्रोकोडायल या फिर फ्रॉग आदि भी बना सकते हो.

4. एम-बोट एजुकेशनल रोबोट
स्टेम एजुकेशन द्वारा तैयार किया गया यह खिलौना मजेदार है. इसे एसेंबल करना काफी आसान है. इसकी मदद से तुम ग्राफिकल प्रोग्रामिंग और इलेक्ट्रोनिक्स रोबोटिक्स के मेल को समझ सकते हो. यह रोबोटिक लर्निंग के लिए एक ऑल-इन-वन पैकेज की तरह है. इसके जरिये तुम ग्राफिकल सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग सीख सकते हो. यह स्क्रैच 2.0-मैक और विंडो बेस्ड गैजेट है. इसमें लाइट सेंसर और अल्ट्रासोनिक सेंसर भी लगा हुआ है. ब्लूटूथ के जरिये इससे वायरलेस कम्यूनिकेशन स्थापित किया जा सकता है.

5. रोबो मी रोबोट
रोबो मी एक ऐसा रोबोट है, जो तुम्हारे इशारे और शब्दों को भी समझ सकता है. तुम इसे अपने स्मार्टफोन की मदद से मनचाही पर्सनालिटी भी दे सकते हो. इसमें तुम कुछ आदते भी डाल सकते हो जैसे- जब भी कोई उससे हाथ मिलाये, तो खुशी से नाचने लगना, कोई मुश्किल सवाल सुनते ही भाग जाना आदि. यह वॉयस कमांड को काफी अच्छे से समझता है और इधर-उधर बिना किसी चीज से टकराये घूमने में सक्षम है. अगर तुम चाहो तो रिमोट कंट्रोल के द्वारा भी इसपर नियंत्रण रख सकते हो. स्मार्टपोन से कनेक्ट करते ही यह एक रोबोटिक स्पाइ में बदल जाता है. इससे तुम कहीं से भी वे सारी चीजें देख और सुन पाओगे, जो रोबो मी और उसके आस-पास के लोग कर रहे होंगे.
------

फ्लाइंग गैजेट्स और खिलौने

ओनागोफ्लाइ : फ्लाइंग गैजेट्स जितने छोटे हों, उतने बेहतर रहते हैं. उदाहरण के तौर पर तुम ओनागोफ्लाइ को ट्राय कर सकते हो. यह 140 ग्राम का पाम-साइज क्वाडकॉप्टर है. इसमें ऐसे फीचर्स हैं, जो तुम्हें दूसरे ड्रोन्स में नहीं मिलेंगे. इसमें इन्फ्रारेड कोलेजन अवाइडेंस सिस्टम है- सभी चारों दिशाओं में इमीटर और रिसीवर हैं, जो ड्रोन को पेड़, पिलर या दीवार से टकराने से बचाते हैं. इसका बिल्ट इन कैमरा 1080 पी एचडी वीडियो या 15 मेगापिक्सल स्टिल इमेज ले सकता है. फोन पर रिमोट कंट्रोल एप से ड्रोन के वाइफाइ सिग्नल से कनेक्ट हो जाते हैं और तुम कैमरे से लाइव फीड देख सकते हो.

रिमोट कंट्रोल हेलीकॉप्टर : रिमोट कंट्रोल से उड़नेवाले हेलीकॉप्टर और प्लेनों की भी खिलौनों की दुनिया में खास जगह है. हर बच्चा उसका पायलट बन ऊंचाइयां नापना चाहता है. यह बैटरी से चलनेवाले खिलौने काफी मजेदार होते हैं. साथ ही, अगर उसी प्लेन पर कैमरा फिट हो, तो इसकी बात ही कुछ और हो जाती है. आजकल कई ऐसे हेलीकॉप्टर भी आ रहे हैं, जो स्मार्टफोन और एप्स से कनेक्ट होकर संचालित होते हैं. 

360 फ्लाइ गैजेट : यह पैनारोमा वीडियो कैप्चर कर सकते हैं. 360 फ्लाइ एक सिंगल कैमरा है, जो सिंगल लेंस से 360 डिग्री वीडियो कैप्चर कर सकता है. इसे स्टैंडअलोन कैमरे की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है. तुम इसे अपनी साइकिल पर भी लगा सकते हो. यह वाटरप्रूफ है. इसमें वाइफाइ और ब्लूटूथ बिल्ट इन है. तुम अपने फोन के एप का इस्तेमाल करके वीडियो का प्रिव्यू देख सकते हो, वीडियो एडिट व शेयर कर सकते हो. इसका वजन सिर्फ 138 ग्राम है. इसमें रिचार्जेबल बैटरी है, जो दो घंटे तक आसानी से बैकअप देती है.
-------

सोलर आधारित खिलौने

बाजार में मिलनेवाले ज्यादातर आधुनिक खिलौने बैटरी से चलते हैं. वहीं सोलर एनर्जी से चलनेवाले खिलौनों में लगी बैटरी को बिजली से चार्ज करने की जरूरत नहीं होती है. इस तरह की टॉय कार या फिर रोबोट सोलर एनर्जी से चलते हैं. इसकी कीमत भिन्न-भिन्न हैं, लेकिन शुरुआत 200 से 350 रुपये से हो जाती है.
--

खिलौने खरीदो मगर स्मार्टनेस के साथ

---
कई बार तुम मेले में या दुकान पर बस चमकते रंग-बिरंगे खिलौने देख कर ही उसे खरीद लेते हो, लेकिन घर तक आते-आते ही उससे तुम्हारा मन उब जाता है. दरअसल, बाजार में कुछ गेम्स ऐसे हैं, जो तुम्हारी उम्र के साथ तुम्हें नयी चीजें सिखाने में मदद करते हैं. अगर तुम्हारी उम्र 4 से 5 साल के बीच है, तो तुम्हें पहेलियोंवाले खिलौने, किताबें, चित्र बनानेवाली कॉपियां, रंग, विभिन्न आकार और अक्षर बनाने के लिए क्ले, घर बनानेवाले ब्लॉक्स, बैट बॉल आदि खिलौने तुम्हारे काफी काम आ सकती हैं. वहीं, अगर तुम्हारी उम्र 6 से 8 साल के बीच है, तो तुम्हें आउट डोर गेम्स से जुड़े खिलौने लेने से लाभ होगा. तुम अपने दोस्तों को भी खिलौने गिफ्ट कर सकते हो.
---------------

कार बन जाती रोबोट 

हॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म ट्रांसफॉर्मर में कारें कुछ ही मिनट के भीतर रोबोट में बदल जाती है. तुम्हें जान कर आश्चर्य होगा कि दुनिया की पहली ट्रांसफॉर्मर कार बन कर तैयार है. इसे भी बनाने से पहले खिलौने के रूप में इसका ट्रायल किया गया. सबसे पहले जापान के तीन इंजीनियर्स ने मिल कर ट्रांसफॉर्मर खिलौने का मॉडल 2014 में तैयार किया था. हाल ही में उन मॉडल्स से प्रेरित हो कर तुर्की के 12 इंजीनियर और 4 टेक्नीशियन ने मिल कर कार को ट्रांसफॉर्मर रोबोट बना दिया. इन इंजीनियर्स ने 8 महीने की मेहनत से यह असाधरण काम कर दिखाया. उन्होंने बीएमडब्लू कार को रोबोट में बदल दिया. यह कार रोबोट बनने में सिर्फ 50 सेकेंड का वक्त लेती है. इसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है. यह कार रोबोट बनने पर 120 डिग्री तक घूम सकती है. इस रोबोट के दो हाथ, दो पैर और सिर भी है. हाथ और सिर में मूवमेंट हो सकता है. ट्रांसफॉर्मर कार बनानेवाली कंपनी लैटरॉन दुनिया की जानी-मानी ओटोमोबाइल कंपनी है. लैटरॉन ने इस रोबोट कार का नाम एंटीमोन रखा है. हालांकि कार से रोबोट बनने के बाद यह कार चल नहीं पाती है, लेकिन इसके लिए इंजीनियर्स प्रयास कर रहे हैं.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जीवन की सार्थकता

लोग कहते हैं जीवन नश्वर है। बहुत से महान व्यक्तियों और संतों ने भी इस बात की सत्यता भी प्रमाणित की है। वे बड़े लोग थे उन्हें झूठलाया नहीं जा सकता- लेकिन मेरी समझ में जीवन नश्वर नहीं है। अगर नश्वर होता तो आज विश्व में मानव का आस्तित्व ही नहीं रहता। नश्वर शब्द का तात्पर्य उस वस्तु से है जिसका आस्तित्व ना रहें। किंतु मानव का आस्तित्व था, है, और रहेगा। व्यक्तिगत मृत्यु मानव का विनाश नहीं है। वह सिर्फ निरर्थक पत्तों का गिरना मात्र है। जिससे मानव रूपी वृक्ष की सुन्दरता विकृत ना हो जाय। व्यक्तिगत क्षति मेरी क्षति है। पर मानवता की नहीं...... विवेकानन्द आई आई एम सी

बिहार चुनाव को लेकर क्या है जनता परिवार की राजनीति?

विवेकानंद सिंह जनता परिवार को लेकर सबके दिमाग  में अभी बस एक ही बात आ रही होगी कि इतना हो-हल्ला और कई मीटिंग्स के दौर के बाद जब सबने एक होने का फैसला कर ही लिया तो बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह विलय क्यों नहीं? जब मोदी की लहर के कारण धुर विरोधी हो चुके दो भाई गले मिलने को तैयार हो ही गए तो अब आखिर क्या समस्या हो गई? क्या लालू-नीतीश के रिश्तों में फिर से दरार आ गई? क्या पप्पू और मांझी का इसमें कोई फैक्टर तो नहीं है? लेकिन सवालों से इतर हकीकत यही है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में राजद-जदयू के विलय से बेहतर विकल्प उनके लिए गठबंधन ही है। राजद के एक नेता से मेरी बात हुई तो उनका कहना था कि उनके लिए सीटों की संख्या से बड़ा मसला 16 वीं बिहार विधान सभा चुनाव में बीजेपी को सत्ता तक पहुँचने से रोकना है। बीजेपी के नेता ने कहा कि इनकी आपसी लड़ाई के बीच हम 175 का आंकड़ा छूने में कामयाब होकर रहेंगे। खैर हार-जीत का पता तो चुनाव के बाद ही चलेगा लेकिन जनता परिवार में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इस हलचल पर मशहूर नारा याद आ रहा है “अभी तो ये अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है”। देखना दिलचस्प होगा क...

यहां सरकारी स्कूलों के 'शिक्षक' बने हैं 'मैनेजर'

विवेकानंद सिंह सरकारी स्कूलों में मिलनेवाली शिक्षा की गुणवत्ता की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। खास तौर से बिहार के सरकारी स्कूलों में काम करनेवाले शिक्षक आजकल गजब के मैनेजर बन गये हैं। हो सकता है आपको मेरी बातें थोड़ी अजीब लगे, लेकिन यह एक सच्चाई है। पढ़ाने के अलावा अपनी नौकरी बचाने के लिए व कम सैलरी को बेहतर बनाने के लिए उन्हें कई तरह से खुद को और छात्रों के अटेंडेंस को मैनेज करना पड़ता है। उन्हें हर दिन बच्चों के बिना स्कूल आये भी, उनका अटेंडेंस बनना पड़ता है। इसमें हेडमास्टर साहब (प्रधानाध्यापक) से लेकर शिक्षक भी एक-दूसरे की मदद करते नजर आते हैं। हालांकि, वे भ्रष्ट नहीं, बल्कि बस मैनेज कर रहे होते हैं, क्योंकि उनके ऊपर बैठे प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी का काम भी सिर्फ अपनी सैलरी से तो नहीं चल पाता है। दरअसल, वे लोग भी मैनेज कर रहे होते हैं। क्योंकि, सबसे खास बात यह है कि बच्चों के पिता खुद ही मैनेज कर रहे होते हैं। वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की चाह में अपने बच्चे को ट्यूशन देते हैं, प्राइवेट टाइप स्कूल में पढ़ने भेजते हैं, लेकिन सरकारी सिंड्रोम से ग्रस्त हो...