विवेकानंद सिंह क्रोमोजोम यानी गुणसूत्र से तो आपलोग वाकिफ ही होंगे। इसमें जरा-सा एब्रेशन (दोष) आ जाये, तो अपंगता, मेंटल रेटार्डनेस, नपुंसकता जैसी समस्याएं आम बात हो जाती हैं। सत्ता के मामले में भी ऐसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। बहुमत से एक सीट भी इधर-उधर हों, तो पूरा का पूरा खेल बिगड़ जाता है। अब उत्तर प्रदेश में होनेवाले विधानसभा चुनाव को ही लीजिए। वहां की 403 विधानसभा और एक एंग्लो-इन्डियन सदस्य सहित 404 विधानसभा सदस्यों वाली विधानसभा में विजयी आंकड़े यानी 203 सीटें हासिल करने का हर पार्टी का अपना समीकरण है। अभी तक जो चुनावी रुझान बन रहे हैं उस हिसाब से सत्ता की रेस में तीन प्रमुख पार्टियां शामिल हैं। बाकी दलों में कांग्रेस राहुल गांधी को नेतागिरी की ट्रेनिंग देने के लिए और बचे-खुचे बस अपनी दाल-रोटी की जुगाड़ के लिए मैदान में डटे हैं। हालांकि, मामला इतना भी आसान नहीं है, जितना कि सर्वे वाले बता रहे हैं। फिर भी राज्य में धीरे-धीरे हालात कुछ ऐसे बनाये जाने की कोशिश हो रही है कि बहुसंख्यक हिन्दू अस्मिता जग जाए और वे जय श्री राम का नारा लगानेवालों के साथ हो लें। क्योंकि,...